गांव नचार खेड़ा में गंदे पानी की निकासी व्यवस्था Dirty water drainage system of village

 यदि गांव के गंदे पानी की निकासी की बात करें तो इस बारे में हमेशा से ही मतभेद रहे हैं और गांव कोई छोटा हो या बड़ा तो पानी निकालने के बारे में विवाद होते ही रहते हैं तो ऐसे ही मैं जब कहीं पर जा रहा था तो अंकित के पास रास्ते में रुक गया इस बात पर डिस्कस करने के लिए क्योंकि वह अक्सर गांव में रहता है और उसको गांव कि मुझसे ज्यादा जानकारी है तो उसने बहुत ही लाभदायक और विश्वसनीय जानकारी प्रदान की जिसके मुझे जरूरत थी

सबसे पहले हमने जो स्कूल के पास से सबसे अधिक पानी एकत्रित हुआ है उसके बारे में बात की तो उसने बताया कि जो पिछले सरपंच थे दिलबाग हालांकि उनके छोटे भाई की पत्न सरपंची नाम दिलबाग का ही चलता था तो फिर उन्होंने जो नालियों के ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था थी उसको बदल के रख दिया था कि उनके घर के सामने से होकर के चढ़ाया जाए क्योंकि उन्होंने अपने घर के सामने साफ सफाई रखने की सोची और इस बारे में उन्होंने अपनी मनमानी की जो कि उचित नहीं था और इसी वजह से वहां पर काफी सारा पानी इकट्ठा हो गया था और ऐसा अक्सर हर एक गांव में होता है जिसके पास सरपंच सी होती है वह कुछ न कुछ ऐसे कदम उठाते हैं जिससे अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और वह सर्वजन के भलाई की बजाय सिर्फ अपना हित साधने रखते हैं

तो मैंने और अंकित ने इस बात पर निष्पक्ष तरीके से बात करनी शुरू की और जैसा कि बड़े बुजुर्गों से जाने पर भी पता चला कि अगर हम बात करें पीछे बसाऊ धर्मवीर लोहार और ताऊ सरजीत खाती के घर और साथ में दादा का पानी सीधा उसी दीवार के सहारे सहारे चलता हुआ दीपू के घर के पास से होता हुआ जो भी बस स्टैंड के पास जोड़ी है उसमें गिरना चाहिए और ऐसे ही उसकी दूसरी साइड बलजीत के घर और हरिकेश तथा भाषा धारा और के घर से ताऊ सुरजन लोहार बलवान लोहार सतवीर लोहार बलवान लोहार सुरजन लोहार के पास से होता हुआ सुलतान पीर वाली जोड़ी में गिरना चाहिए

ऐसे ही जो नई कॉलनी काटी गई थी वह काफी ऊंचाई पर थी परंतु फिर भी उसके गंदे जल की निकासी की व्यवस्था उसी साइड से की जानी चाहिए थी इसके लिए दो ऑप्शन उपलब्ध है या तो वहां पर नई जोड़ी बना दी जाए और उस जोड़ी का पानी फिर आगे खेतों की तरफ सप्लाई कर दिया जाए या फिर दूसरा जो सबसे बढ़िया ऑप्शन था तो वहां पीछे की तरफ से ही 1 जोड़ी जो सुलतान पीर के विपरीत दिशा में थी जिसे पहले शायद इस रूप में प्रयोग किया जाता था कि वहां पर चमड़े का काम किया जाता था और मरी हुई भैंसों को और गायों को शायद वहां पर फेंक दिया जाता था चील और को को खिलाने के लिए या फिर दबाने के लिए तो फिर उस जोड़ी का प्रयोग भी जो कॉलोनी कटी थी सुरपुरा के साइड तो उसका पानी वहां पर उतारा जा सकता है


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